कूड़ा उठाकर कमाती थी ₹5, करती थी पूरे दिन का गुजारा आज यह महिला है करोड़ों की मालकिन

कहानी चालू होती है 1980 के दशक से जब यह महिला सडकों पर कचरे के ढेर में उतरी और उसमें से मूल्यवान वस्तु को उठाने लगी। इनको बेचकर वह दिन का ₹5 कमाती थी। इस महिला का नाम है मंजुला वाघेला आपको बता दें कि 1980 से लेकर 2016 तक का सफर मंजुला का आसान नहीं था। पर वर्ष 2015 के आंकड़ों के मुताबिक उनका वार्षिक टर्नओवर एक करोड़ के आसपास आँका गया था। आज के समय में वह क्लीनर्स कोऑपरेटिव की प्रमुख है। द नर्स कोऑपरेटिव में आज 400 लोग काम कर रहे हैं और यह गुजरात में स्थित है आज यह संस्था 45 इंस्टीटूशन, सोसाइटी की क्लीनिंग और हाउसकीपिंग का काम कर रही है।

इस महिला का नाम है मंजुला। जब मंजुला से बात की तो पता चला कि मंजुला कभी भी मेहनत से नहीं घबराती है। जब वह ₹5 के लिए दर-दर भटकती और कूड़ा उठाती थी तब भी वह उस तरह की मेहनत कर रही थी, जिस तरह वह आज करती है। हमेशा से ही उनकी सुबह काफी जल्दी हो जाती है। उसमें वह एक बड़ा सा थैला उठाती हैं और निकल पड़ती हैं अपने काम की ओर। लोगों के द्वारा फेंका गया कचरा उठाकर वह रीसाइकिल मटेरियल करने लायक कचरा अलग करती हैं। इसके बाद वह इस कचरे को कबाड़ वाले को भेज देती हैं। परंतु ऐसा तो हर कचरेवाला करता है तो यह एक सामान्य बात है ? यह कार्य मंजुला काफी समय से कर रही थी। परंतु मंजुला के जीवन में नया मोड़ तब आया जब उनकी मुलाकात सेल्फ एंप्लॉयड एसोसिएशन के संस्थापक इलाबेन भट्ट से हुई।

इलाबेन भट्ट 40 सदस्यों वाले श्री सौंदर्य सफाई उत्कर्ष महिला सेवा सहकारी मंडली लिमिटेड चलाती हैं। जिसका निर्माण मंजुला की मदद से हुआ। इस उद्योग को खड़ा करने के लिए इलाबेन भट्ट ने काफी मदद की। परंतु मंजुला के ऊपर बहुत ही ज्यादा दिक्कत तब आई जब उनके पति इस दुनिया से चले गए जो एक बेटा छोड़ गए। परंतु इन सब दिक्कतों के बाद भी मंजुला ने अपना लक्ष्य पकड़ रखा था और इसी जद्दोजहद के दौरान उनको सौंदर्य मंडली से एक ग्राहक मिला जो कि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन से था। इसके बाद उन्होंने भवन राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्थल की ऑर्गेनाइजेशन में अपनी सेवाएं देना चालू किया। उन्होंने जाने-माने गुजरात का इंटरनेशनल इवेंट वाइब्रेंट को भी सफाई सेवा मोहिया करवाई।।

इस सफर में परेशानियां और दिक्कत बहुत आई। परंतु, मंजुला का कहना है कि उनका फोकस पूरा क्लियर था और जब इतना लंबा सफर तय किया है तो आत्मविश्वास बढ़ जाता है। इतने लम्बे सफर में वह काफी सारी नई तकनीक वाले उपकरणों का इस्तेमाल करना जान चुकी थी। जैसे कि माइक्रोफाइबर, माप,स्क्रब्स फ्लोर, क्लीनर रोड, क्लीनर्स एक्सट्रैक्टर्स ,हाई जेट प्रेशर आदि। वह आज के समय में बहुत बड़ी कंपनियों और संगठनों की सफाई के लिए कॉन्ट्रैक्ट जारी करते हैं और इस समस्या से निदान पाने के लिए वह अनेकों लोगों को नौकरी पर भी रख रहे हैं।

इन सारी प्रक्रियाओं के बीच में वह कभी अपने बेटे को यह याद नहीं दिलाना चाहते हैं कि उनका पुराना समय कैसे बीता। वह चाहते हैं कि वह अपने बेटे की मेडिकल शिक्षा पूरी करवाएं और उसके लिए पैसे भी जमा करें। मंजुला अपने बेटे के लिए एक नया जीवन देना चाहती हैं। साथ ही मंजुला और उसके बेटे के संघर्ष की कहानी आसान नहीं थी। पति की मृत्यु के बाद किस तरीके से मंजुला ने पूरे परिवार की जिम्मेदारी उठाई और खुद का एक उद्योग खड़ा किया यह अपने आप में ही एक प्रेरणादायक कहानी है। साथ ही उन्होंने अनेकों महिलाओं की जिम्मेदारी उठाते हुए उन्हें भी रोजगार दिया और आज के समय में वह करोड़ का आंकड़ा आसानी से छू चुकी हैं।

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