मजदूर ने ₹25000 से की शुरुआत आज खड़ा किया करोड़ों का विशाल साम्राज्य

सफलता पाने वाला इंसान कभी अभावों का मोहताज नहीं होता अगर आपके अंदर कुछ कर गुजरने की चाहत है तो आप कोई भी लक्ष्य हासिल आसानी से कर सकते हैं। हमारी आज की कहानी एक ऐसे शख्स को समर्पित है जिन्होंने कुछ ऐसा कर दिखाया जो आम आदमी के लिए नामुमकिन प्रतीत होता है।

आज आप ऐसे शख्स की सफलता की कहानी पढ़ने जा रहे हैं। जिन्होंने किस तरह से शून्य से चालू कर शिखर तक का सफर तय किया। यह शख्स बचपन से ही काफी गरीबी में पला बड़ा है और इनका बचपन अन्य बच्चों से भिन्न रहा है परंतु इतने अभावों के बाद भी आज करोड़ों रुपए की बीस कंपनियां इनके अंदर काम कर रही हैं। जी हां आज हम बात करने वाले हैं आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले में पैदा हुए मधुसूदन की जिंदगी के बारे में जिस को पढ़कर आपको बहुत हौसला मिलेगा।

मधुसूदन एक गरीब अशिक्षित परिवार में जन्मे बालक हैं उनका पूरा परिवार जमींदारों के घरों में मजदूरी करके बीत गया उनके पिता खेतों में ही काम किया करते थे। एवं माताजी तमाकू की फैक्ट्री में कार्यरत थी जिस तरह का इन्होंने काम चुना हुआ था इस काम से सिर्फ और सिर्फ पेट भरा जा सकता था। परंतु उनका परिवार थोड़ा बड़ा था जिस वजह से 18 घंटे की मजदूरी पर भी भरपेट खाना नसीब नहीं होता था। इतनी बुरी आर्थिक स्थिति के बावजूद उनके माता-पिता ने उनको पढ़ाया लिखाया और आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।आपको बता दें कि मधुसूदन एक दलित समाज से वास्ता रखते हैं और कई बार उन्हें सामाजिक दबावों का भी सामना करना पड़ता था।

उनकी जिंदगी में काफी परेशानी आई परंतु इन परेशानियों को दरकिनार करते हुए अपनी पढ़ाई को उन्होंने जारी रखा और प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही स्कूल से प्राप्त की इसके बाद नौकरी की चाह में उन्होंने पॉलिटेक्निक किया पॉलिटेक्निक के बाद उनकी इच्छा हुई कि वह जल्द से जल्द किसी नौकरी पर लग जाए जिससे कि वह आर्थिक स्थिति को संभाल सके परंतु अफसोस, उन्हें हर जगह रेफरेंस मांगा जाता था और पुछा जाता था की तुम किसी कंपनी के आदमी को जानते हो।

रेफरेंस की वजह से उन्हें नौकरी नहीं मिल पाई और उन्होंने फैसला किया कि वह अपने भाई के साथ मजदूरी कर लेंगे साथ ही साथ और एक सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी भी करने लगे। परंतु एक दिन ऐसा होता है कि वह एक नौकरी के इंटरव्यू के लिए जाते हैं और वहां पर अपनी बारी का इंतजार करते हैं। वहीं खड़े दो लोगों को वह बात करते हुए सुनते हैं कि उनको एक प्रोजेक्ट के लिए बहुत सारे मजदूरों की जरूरत है।

इस बात को सुनते ही मधुसूदन ने ना आव देखा ना ताव और बिना किसी देरी के मजदूरों का टेंडर ले लिया इस टेंडर को उन्होंने सफलतापूर्वक निपटाया और साथ ही ₹25000 की आमदनी हुई और यह उनके जीवन की पहली सफलता थी। इन 25000 रुपयों को उन्होंने बर्बाद ना करते हुए सोचा कि क्यों ना इससे अपनी ही कंपनी खोली जाए जिसके लिए बड़े स्तर पर काम किया जाए। उन्होंने फिर एमएमआर ग्रुप के नाम से अपने सपनों की नींव रखी शुरुआती दिनों में खासा परेशानी आई जिसमें उनको मजदूरों की सप्लाई का काम करना होता था साथ ही बड़ी-बड़ी टेलीकॉम कंपनियों के लिए केबल बिछाने का काम करना होता था जो कि उन्होंने 4 से ज्यादा राज्य में पूरा करके दिखाया था।धीरे-धीरे उन्होंने अपने इस कार्य को बढ़ाया और आज के समय में एमएमआर ग्रुप के भीतर 20 से ज्यादा कंपनियां जो अलग-अलग डिपार्टमेंट से हैं जैसे मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, फूड प्रोसेसिंग, टेलीकॉम, आईटी के क्षेत्रों में कार्य कर रही हैं और करोड़ों का मुनाफा भी कमा रही है।

अपनी कार्य निष्ठा की वजह से आज मधुसूदन सफल व्यक्तियों में गिने जाते हैं आज भी दिन में 18 घंटे काम करते हैं और यह एक प्रेरणा का स्रोत बने हैं कई युवाओं के लिए वह कहते हैं कि कभी हार ना मानने वाला व्यक्ति किसी भी मुश्किल से नहीं डरता और उसे कोई कठिनाइयां परास्त नहीं कर सकती।

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