खेती कर कमाती थी दिन का 5 रूपए – आज USA में है 6 घर , 2 मर्सिडीज़ और करोड़ो की मालकिन

सपने पूरे करने के लिए उनके पीछे करी गई मेहनत आसान नहीं होती है और ऐसा ही कर दिखाया है इस महिला ने। जीवन की यात्रा में बहुत से व्यक्ति आपको मिलेंगे जो सपनों के बीच में आपका उत्साह कम करेंगे। इन लोगों के कारण काफी लोग अपने सपने बीच रास्ते में ही छोड़ देते हैं। परंतु कुछ ऐसे बहादुर भी होते हैं जो परिस्थितियों के विपरीत जाकर सफलता हासिल कर लेते हैं। आज हम बात करने वाले हैं अनिला ज्योति रेड्डी की जिसने महिला शक्ति और दृढ़ संकल्प का अनोखा उदाहरण लोगों के बीच उतारा है।

जब वह छोटी थी, तो वह एक अनाथालय में रहती थी। वह बेहद ही ज्यादा गरीब थी, गरीबी से जूझ रहे उनके पिता ने उनका दाखिला अनाथालय में करा दिया था। उनके पास उसको पालने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं हुआ करते थे और उन्होंने यह बहाना दे दिया कि वह उनकी लड़की नहीं है जिस वजह से अनाथालय में लड़की को आसानी से अनाथालय में जगह मिल गई।

जब अनिला 16 वर्ष की थी तभी उनकी शादी एक 28 वर्ष के उम्र दराज व्यक्ति से हो गई थी। उस समय काफी ज्यादा रूढ़िवादी लोग रहा करते थे और वह बेहद प्रचलित प्रथाओं से बंधे हुए थे परंतु अनिला को यह बिल्कुल भी पसंद नहीं था। जिस व्यक्ति से अनिला की शादी हुई थी उसने पढ़ाई लिखाई नहीं करी थी और वह एक किसान था। शादी के कुछ वर्ष तक नीला को शौच के लिए खेतों में ही जाना पड़ता था और खेत में काम करते हुए 1 दिन के ₹5 कमाती थी।

महज 17 वर्ष की छोटी आयु में उसने एक बच्चे को जन्म दिया और अगले ही वर्ष वह दूसरी बार मां बनी, वह पूरे दिन घर में काम करती रहती थी और परिवार को अच्छे से चलाने की जिम्मेदारी उस पर ही थी। परिवार को चलाने के लिए संसाधनों की भी जरूरत होती है। पर संसाधन की काफी कमी थी। परन्तु ऐसी खराब स्थितियों का सामना करते हुए भी वह डटी रही। वह दिन-रात बस इस गरीबी से बाहर निकलने के सपने देखती रहती थी। वह दिन पर दिन इस गृहस्ती भरे काम में धंसती चली जा रही थी।

जब वह खेत में काम करती थी तो घर पर सारा काम बिखर जाता था और जब वह घर पर काम करती तो खेत का सारा काम अधूरा रह जाता था। परंतु इन सब के बावजूद उसने अपने बच्चों को अशिक्षित नहीं छोड़ा। अनिला ने अपने बच्चों को पास के ही तेलुगू मीडियम स्कूल में भेजा था, ताकि उनकी पढ़ाई पूरी हो सके। परंतु स्कूल की फीस ₹25 प्रतिमाह होती थी और ज्योति यह सारा पैसा खेतों में मजदूरी करके चुका देती थी। धीरे-धीरे अनिला ने अपने सभी बंधुओं को पीछे छोड़ दिया और आसपास के खेतों में काम करने वाले लोगों को सिलाई सिखाना चालू कर दिया। इसके बाद उन्हें एक अलग पहचान मिलने लगी और एक सरकारी नौकरी भी प्राप्त हुई, जिसमें उन्हें ₹120 हर महीने की तनख्वाह मिलने लगी। अनिला का काम आसपास के गांव की महिलाओं के पास जाना और उनको सिलाई कढ़ाई सिखाना था।

कैसे बनी एक सिलाई सिखाने वाली सीईओ।

अनिला आगे की पढ़ाई काकटिया यूनिवर्सिटी(अमेरिका ) से करना चाहती थी वह कहती है ” मैं इंग्लिश में एम्ऐ करना चाहती थी परंतु यह संभव नहीं हो पाया “

परंतु जैसे-तैसे अनिला ने अमेरिका जाने का निश्चय किया क्योंकि वह वहां जाकर सॉफ्टवेयर की बुनियादी बातें सीखना एवं जानना चाहती थी और उस समय यूएसए में बसना ही उनका मात्र एक सपना था। एक रिश्तेदार की मदद से ज्योति को वीजा प्राप्त हो गया और वह न्यूजर्सी के लिए निकल पड़ी। वहां पहुंचते ही उन्होंने छोटे-छोटे काम करना चालू कर दिया जैसे रूम सर्विस, बेबी सीटर, असिस्टेंट, सेल्स गर्ल और सॉफ्टवेयर रिपोर्टर की नौकरी करी। इन सब के जरिए उन्होंने अपने सपनों को उड़ान दी। आज अनिला के पास 6 घर है और भारत में दो घर हैं इतना ही नहीं अनिला मर्सिडीज जैसी महंगी गाड़ियों को भी खरीद चुकी हैं और आज वह यूएसए में रह रही है, लेकिन वह 29 अगस्त को हर साल भारत आना नहीं भूलती वह यहां इसलिए आती हैं क्योंकि उनका 29 अगस्त को जन्मदिन होता है और वह यह जन्मदिन अनाथालय में बच्चों के साथ मनाती हैं।

अनिला अनाथालय के बच्चों के लिए काफी सारे उपहार ले जाती हैं और वह ऐसा इसलिए करती हैं क्योंकि बचपन में भी वह एक छोटी उम्र में अनाथालय में ही रहती थी। कुछ इस तरीके से अपनी छोटी सी उम्र से लेकर इतने संघर्षों के बाद सिलिकॉन वैली की सीईओ बनने तक अनिला की कहानी बेहद ही प्रेरणादायक है। अनिला भारत के युवा वर्ग को प्रेरित कर रही है और जो अनिला की तरह ख्वाब देखने वाले लोग हैं उनको अंधेरे से पार लगाने का पूरा प्रयास कर रही हैं।

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