गंगा नदी कहाँ से निकलती है और कहाँ को जाती है – दिल दहला देने वाले तथ्य के साथ

हिमालय संसार का सबसे ऊंचा पर्वत माना जाता है और पवित्र पहाड़ों में से एक है। अनेको पर्यटक यहां पर आते है और अनेको शोध हिमालय पर्वत पर होते रहते हैं। हिमालय की पहाड़िया पूरे उत्तर भारत में फैली हैं पाकिस्तान से लेकर नेपाल भूटान तक इसकी पहुँच है। इस हिमालय पर्वत पर काफी ठण्ड होती है और हवा की नमी से ही यहां पर बर्फ तैयार हो जाती है। जब यह बर्फ पिघलना चालु होती है तो पानी बनकर बहने लगती है ऐसे में यह पहाड़ों से बहते हुए यह पानी अलग अलग नदियों का रूप ले लेता है। परन्तु यहाँ पर एक राज्य बेहद ही ख़ास माना गया है जिसका नाम है उत्तराखंड और उत्तराखंड के गढ़वाल में यह पर्वत सरहद का काम कर रहे हैं। इन ही पर्वतो से निकलती है गंगोत्री नदी जो की गंगोत्री की बर्फीली चट्टान यानी की गंगोत्री ग्लेशियर है।

इसको देव भूमि भी कहते है। इस देव भूमि में ही मौजूद है गौमुख जिसका अकार गाय के मुख जैसा है। यहां पर एक खड़ी चटान से गंगोत्री ग्लेशियर टकराता है। इस टकराव के बाद यह बर्फ टूटकर पानी बन जाती है। इसीके साथ इसके 2 रूप हो जाते हैं। यह गंगा के दो रूप होते हैं जिनका नाम है धौली गंगा और विष्णु गंगा यह दोनों गंगा का मिलन होता है विष्णु प्रयाग में। इसके बाद अब जो मिलन के बाद धरा बहती है उसको कहा जाता है अलकनंदा नदी। अब जैसे नदी आगे की और बहती है वैसे ही इसमें और नदियाँ भी मिलती रहती हैं। अलकनंदा नदी में नंदाकनी नदी मिलती है और उस जगह को कहते है नन्द प्रयाग। इसके बाद एक और नदी इसमें मिलती है जिसका नाम है पिंडार परन्तु वह भी अलकनंदा की गहराई से कम है इसलिए अलकनंदा ही आगे की और बढ़ती चलती है।

वहीँ दूसरी और से केदारनाथ से मन्दाकिनी नदी आती है जो की अलकनंदा में मिल जाती है और इस जगह को कहते हैं रूद्र प्रयाग। परन्तु अभी भी अलकनंदा ही गहरी है इसलिए वही आगे की और बहती चलती है। इसके बाद उत्तरकाशी से भी एक नदी निकलती है जिसको भागीरथी कहते हैं। यह अपने आप में एक विशालकाय नदी है और वहां के स्थानीय लोगो का मानना है की यही गंगा है। अब भागीरथी और अलकनंदा का मिलन हो जाता है और इस जगह को कहते है देव प्रयाग। अब यह दोनों नदियाँ जब आगे की और बढ़ती हैं तो इनको गंगा कहा गया है।

यहां पर पांच जगह से मिलके यह नदियाँ आती हैं जिस वजह से इसको पांच प्रयाग बोला गया है। हिन्दू धर्म के हिसाब से यहाँ घूमने वाले को स्वर्ग प्राप्त होता है। ज़िन्दगी में एक बार इन पांचो प्रयाग स्थलों पर घूमना चाहिए। अंत में यह नदी बंगाल की खाड़ी में जाकर मिल जाती है।

गंगा नदी के रहस्य जिसको पढ़कर मन विचलित हो उठेगा आपका

  • गंगा नदी का पानी खराब नहीं होता।
  • गंगा नदी में करीब 30% ज्यादा ऑक्सीजन पाई जाती है।
  • गंगा नदी अब दुनिया की पांचवी सबसे ज्यादा प्रदूषित नदी बन चुकी है।
  • 5 गुना तेज कार्बोनिक कचरा हर साल डाला जा रहा है जो इंडस्ट्रीस से उत्पन्न हो रहा है।
  • हरिद्वार से करीब 500 मीटर और बिहार से 2 किलोमीटर की दूरी पर गंगा स्थानांतरित हो चुकी है।
  • अगर गंगा नदी के पानी में आप कीटनाशक मिलाएंगे तो बाकी कीटनाशक तत्व ख़तम हो जायेंगे जिनकी मात्रा 50 % से ऊपर है।

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