जानिए क्या है असली ग्रीन पटाखों का सच और इनके प्रकार

डेस्क : यह सवाल तो आपके दिमाग में हमेशा से ही आया होगा कि आखिरकार यह ग्रीन पटाखे होते क्या है, तो आज हम यही जानने वाले हैं कि आखिर यह ग्रीन पटाखे हैं क्या? दरअसल ग्रीन पटाखे बाजार में इसलिए उतारे गए हैं ताकि वह आम पटाखों के मुकाबले प्रदूषण कम कर सके और सरकारी संस्थानों की तरफ से यह दावा किया जाता है कि ग्रीन पटाखों से 50% कम प्रदूषण होता है।

ऐसे ही में जिस संस्था ने इस पटाखे को बाजार में उतारने के काबिल बनाया उस संस्था का नाम है नीरी। अगर बात करें कि ग्रीन पटाखे की खोज किसने करी तो यह भारत की राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान जो निरी के नाम से जानी जाती है उसने ग्रीन पटाखों का कांसेप्ट खोज निकाला है साथ ही नीरी एक सरकारी संस्थान है जिसमें अनेकों वैज्ञानिक दिन और रात मेहनत करते हैं ताकि वह पर्यावरण की सुरक्षा के लिए उचित कार्य कर सकें यह निरी संस्था औद्योगिक अनुसंधान परिषद के अंतर्गत आती है

पिछले कुछ दिनों में केंद्रीय विज्ञान मंत्री हर्षवर्धन ने यह पुष्टि की थी कि csir-neeri के वैज्ञानिकों ने एक प्रोग्राम भी रिलीज किया जिसमें उन्होंने मुख्य तौर पर यह पुष्टि की कि इन पटाखों से ज्यादा प्रभाव पर्यावरण पर नहीं पड़ता है क्योंकि इसमें जो सल्फर और नाइट्रोजन मौजूद है वह फटने के बाद हानिकारक गैसें पानी में मिल जाती है क्यूंकि फटने के बाद इनमें से पानी निकलता है और इसमें जहरीली हवाएं बैठ जाती हैं। इन पटाखों के फटने के बाद खुशबू भी आती है।

पटाखों के ऊपर पाबंदी लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में दिया था आदेश


कोर्ट का कहना था की चाहे दिवाली हो या नए साल की खुशी इसमें आम जनता पटाके नहीं फोड़ सकती। परंतु यह फैसला काफी जल्दबाज़ी में लिया गया जिस वजह से लोगों को समय नहीं मिला कि वह ग्रीन पटाखे खरीद सकें। परन्तु इस बार ऐसे दुकानदारों की भी कमी नहीं है जो बाजार में ग्रीन पटाखे बेच रहे हैं और खरीददारों की भी कमी नहीं है जो पटाखे खरीदना चाहते हैं अगर आप चाहते हैं कि आप भी ग्रीन पटाखे खरीदें तो आप अपने ही पास के इलाकों में छानबीन कर पता कर सकते हैं क्यूंकि यह पटाखे हर लाइसेंस रखे हुए पटाखा विक्रेता पर मिलेगा।

ग्रीन पटाखों को बाजार में लाने की एक और वजह यह है कि हर साल दिवाली के बाद अनेकों ऐसे मामले आते थे जहां पर कम उम्र के बच्चे एवं आमजन पटाखों से जल जाते थे। यहां तक की किसी के घर पर आग लग जाती थी या तो किसी के कान पटाखों की आवाज़ से सुनने की ताकत खत्म हो जाती थी, साथ ही पर्यावरण पर दूषित होने का ख़तरा अलग ही मंडराता था।

ग्रीन पटाखे फिलहाल 4 तरह के बनाए गए हैं।

  • ग्रीन पटाखे फटने के बाद निकलता है पानी और जैसे हे यह पानी निकलता है तो बारूद का धुंआ सोख लेता है जिससे हवा में जहरीला धुंआ नहीं फैलता। इसको वाटर रेलीज़र कहते हैं
  • स्टार क्रेकर जिनको सेफ़ थर्माइट क्रैकर भी बोला जाता है। इसमें ऑक्सिडीज़िंग एजेंट होता है जो की पटाखे से निकला सल्फर और नाइट्रोजन को कम कर देता है।
  • इन पटाखों में अल्लुमिनिअम की मात्रा की कम कर दी गई है और इसको सफल नाम दिया गया है।
  • एरोमा क्रैकर्स : इन पटाखों के जलने के बाद हवा में खुशबू फ़ैल जाती है और काला धुंआ काम होता है।

ऐसे में लोगों के दिमाग में यह सवाल भी है कि हमेशा से ही सरकार एक निर्धारित समय पेश करती है जिस दौरान लोग पटाखे जला सकते हैं तो इस बार भी सरकार की तरफ से आदेश है कि वह 8:00 बजे से लेकर 10:00 बजे तक पटाखे जला सकते हैं और इस दौरान उनको ग्रीन पटाखे ही जलाने है। साथ ही अगर कोई भी व्यापारी ग्रीन पटाखे नहीं बेच रहा है तो उसके ऊपर सरकार की ओर से उचित कार्यवाही की जानी तय है जिसकी पुष्टि जस्टिस एके सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण के द्वारा की गई है साथ ही उन व्यापारियों के ऊपर अवमानना का मामला चलेगा।

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